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कुरआने क़रीम की रौशनी में |
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कुरआने करीम अल्लाह को पहचनवाने वाला, हमेशा बाकी रहने वाला और इंसानों के लिए ज़रुरी इल्म का बहता हुआ दरिया है। यह एक ऐसी किताब है जिस में पूरी सच्चाई पाई जाती है। इस में पूर्व में घटित घटनाओ और आगे घटित होने वाली
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रिवायत की रौशनी में |
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हज़रत इमाम महदी (अ. स.) के बारे में हमारे पास बहुत सी रिवायतें मौजूद हैं और इन रिवायतों में हज़रत इमाम महदी (अ. स.) की ज़िन्दगी के विभिन्न पहलुओं को मासूम इमामों (अ. स.) ने अलग
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हज़रत इमाम महदी (अ. स.) के मोजज़ें और करामतें |
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हज़रत इमाम महदी (अ. स.) की ज़िन्दगी का एक हिस्सा, उनके बचपन का ज़माना है जिस में उनके ज़रिये बहुत से मोजज़ें और करामतें देखने को मिलीं हैं, जब कि अल्लाह की इस आख़री हुज्जत की ज़िन्दगी का यह हिस्सा
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हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के असहाब |
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हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के असहाब 313 हैं।
हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के बारे में लिखी गई किताबों में यह ज़िक्र मिलताहै कि आपके ज़हूर के वक़्त उनके 313 ख़ास असहाब
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इमामे ज़माना पर बहस की ज़रुरत |
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शायद कुछ लोग यह सोचें कि बहुत सी कल्चरल और आधारभूत ज़रुरतों के होते हुए हज़रत इमाम महदी (अज्जल अल्लाहु तआला फ़रजहू शरीफ़) के बारे में बहस करने की क्या ज़रुरत है ? क्या इस बारे में काफ़ी हद तक
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ग़ैबत सुग़रा व कुबरा और आपके सुफ़रा |
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आपकी ग़ैबत की दो हैसियतें थीं। एक सुग़रा और दूसरी कुबरा। ग़ैबते सुग़रा की मुद्दत 69 साल थी। उसके बाद ग़ैबते कुबरा शुरू हो गई। ग़ैबते सुग़रा केज़माने में आपका एक नायबे ख़ास होता था, जिसके ज़ेरे एहतमाम हर क़िस्म का निज़ाम चलता था। सवाल व जवाब
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महदवियत का दावा करने वाले |
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जिस तरह से तारीख़ में बहुत से लोगों ने पैग़म्बर होने का दावा किया है, इसी तरहकुछ लोगों इमाम महदी होने का दावा भी किया है।
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इन्तेज़ार करने वालों की ज़िम्मेदारियाँ |
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मासूम इमामों की हदीसों और रिवायतों में ज़हूर का इन्तेज़ार करने वालों की बहुत सी ज़िम्मेदारियों का वर्णन हुआ हैं। हम यहाँ पर उन में से कुछ महत्वपूर्ण निम्न लिखित ज़िम्मेदारियों का उल्लेख कर रहे हैं
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ज़हूर की पाँच अलामतें |
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यनाबीउल मवद्दत में क़ंदूज़ी ने अबू अमामा से रिवायत की वह बयान करता है कि आँ हज़रत(स) ने हमसे ख़िताब करते हुए दज्जाल का तज़किरा किया और फ़रमाया: मदीने से गंदगी को इस तरह दूर करेगा जिस तरह माद्दा लोहे की खोट को दूर करता है। पस उम्मे शरीक ने रसूलल्लाह(स) से अर्ज़ की या रसूलल्लाह उस रोज अरब कहाँ होगें
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महदी (अ) के अंसार |
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सुनने इब्ने माजा, रसूलल्लाह(स) इरशाद फ़रमाया: मशरिक़ से लोग ज़ाहिर होंगें और महदी की हुकुमत तसलीम करेंगें।
सबान ने इसआफ़ूर राग़ेबीन में बयान किया है कि रिवायत में वारिद हुआ है इमाम महदी(अ) के ज़हूर के वक़्त एक मलक आवाज़ देगा। यह महदी ख़ुदा का ख़लीफ़ा है पस तुम लोग इसकी इत्तेबा करो और महदी
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दो ग़ैबतें |
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अली बिन अबी तालिब(अ) फ़रमाते हैं: हमारे क़ायम की दो ग़ैबतें हैं, जिनमें से एक तूलानी होगी। उसकी इमामत पर सिर्फ़ मोहकम और सही मारेफ़त का हामिल ही साबित क़दम रह सकेगा।[9]
अलबुरहान फ़ी अलामाते महदी आख़िरुज़्ज़मान में अबु अब्दुल हुसैन बिन अली से रिवायत की गयी है। आप ने फ़रमाया: महदी(अ) के लिये दो ग़ैबतें होगीं। जिनमें से एक इस
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महदी (अ) रुक्ने शदीद हैं |
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यनाबीउल मवद्दत में महज्जह की किताब से इस तरह रिवायत की गई है रावी बयान करता है कि हज़रत लूत अपनी क़ौम से इस क़ौल का मतलब
لَوْ أَنَّ لِي بِكُمْ قُوَّةً أَوْ آوِي إِلَى رُكْنٍ شَدِيدٍ
(सूरह हूद आयत 80)
इसके अलावा कुछ और नही था कि उन्होने महदी की क़ुव्वत और आपके अंसार की शुजाअत की तमन्ना की थी और यही लोग रुक्ने शदीद हैं। क़ायम के असहाब से एक मर्द की ताक़त चालीस लोगों के बराबर होगी और उनके मर्दों का दिल फ़ौलाद
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महदी(अ) की बैअत काबे से क़रीब वाक़े होगी |
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अलकंजी (शाफ़ेई) बरिवायते होज़ैफ़ा बयान करते हैं, आँ हज़रत(स) ने फ़रमाया: अगर दुनिया से सिर्फ़ एक रोज़ भी बाक़ी रह जायेगा ख़ुदावंदे आलम उस दिन में एक शख्स को मबऊस फऱमायेगा जिसका नाम मेरे नाम पर होगा और अख़लाक़ मेरे अख़लाक़ जैसा होगा लोग उसकी रुक्न व मक़ामे इब्राहीम के दरमियान बैअत करेगें। महदी के ज़रीये ख़ुदावंदे आलम दीन की
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अलामते ज़हूर |
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शबलंजी का नूरूल अबसार में अबू जाफ़र(अ) से इमाम महदी के ज़हूर की अलामात से रिवायत की गयी है हज़रत ने फ़रमाया:
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महदी (अ.) इमाम और ईसा मामूम होंगे |
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अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वा आलिहि वसल्लम ने बयान फ़रमाया: यक़ीनन मेरे बाद मख़लूक़ पर अल्लाह की जानिब से मेरे बारह ख़ुलाफ़ा और औसिया हुज्जत होगें। जिनमें से पहला मेरा भाई और आख़िरी मेरा फ़रज़न्द होगा। लोगों ने अर्ज़ की, या रसूलल्लाह आपका भाई कौन है ? हज़रत ने फ़रमाया: अली इब्ने अबी तालिब।
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इन्तेज़ार |
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जब काले बादल सूरज के तेजस्वी चेहरे को छिपा दें, दश्त व जंगल सूरज की चरण स्पर्श से वंचित हो जायें और पेड़ पौधे व फल फूल उस सूरज की मुहब्बत की दूरी से बेजान हो जायें तो उस वक़्त क्या किया जाये ? जब अच्छाईयों का मुजस्समा और खुबसूरतियों का आइना अपने चेहरे पर ग़ैबत की नकाब ड़ाल ले और इस दुनिया में रहने वाले उसके लाभ से वंचित
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इमाम महदी (अ) क़ुरआन और दीगर आसमानी किताबों में |
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हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का नामे नामी तमाम आसमानी किताबों तौरैत, ज़बूर, इन्जील में मौजूद है।
क़ुरआने करीम की कई आयात में आपके बारे में तफ़्सीर व तावील की गई है।
पैगम्बरे इस्लाम (स.) की ज़बाने मुबारक से मक्के, मदीने में, मेराज के मौक़े पर और दूसरी मुनासेबतों पर तमाम ही आइम्मा-ए मासूमीन के बारे मुख़तलिफ़ हदीसे जारी हुई हैं।
अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने
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ऐतेराज़ात |
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रिवायत में वारिद हुआ है कि हज़रत के जम़ाने में भेड़िये और बकरी एक मक़ाम पर चरेगें, हाँलाकि कि बकरी की तबीयत में
भेड़िये से ख़ौफ़ खाना है। और भेड़िये की तबीयत में बकरी को फाड़ खाना है, चुनाँचे न तो भेड़िया ही बकरी के साथ रह सकता है और न ही बकरी ही भेड़िये के साथ रह सकती है। क़ाबिले गौर अम्र यह है कि हज़रत महदी(अ) के ज़माने में
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